Rajasthan polity notes in hindi(Part 1) | rajyapaal(राज्यपाल)

ADMIN

📚 राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख है और केंद्र सरकार का प्रतिनिधि है
164
मंत्रियों की नियुक्ति
165
महाधिवक्ता
200
विधेयकों पर अनुमति
213
अध्यादेश शक्ति
🏢 कार्यकारी शक्तियाँ
  • मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की नियुक्ति
  • राज्य महाधिवक्ता की नियुक्ति
  • विभिन्न आयोगों के अध्यक्ष की नियुक्ति
  • विश्वविद्यालयों के कुलपति की नियुक्ति
📜 विधायी शक्तियाँ
  • विधानमंडल का सत्र आहूत करना
  • विधेयकों पर अनुमति देना या रोकना
  • अध्यादेश जारी करना
  • विधानसभा को संबोधित करना
⚖️ न्यायिक शक्तियाँ
  • अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति
  • उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों हेतु सुझाव
  • सदस्यों की अयोग्यता पर निर्णय
🛡️ विशेष अधिकार
  • राष्ट्रपति शासन की सिफारिश (अनुच्छेद 356)
  • विधानसभा का विघटन
  • विधानमंडल का अभिन्न अंग
  • राज्य सूची पर पूर्ण अधिकार
अनुच्छेद 164
मंत्रिपरिषद की नियुक्ति

मुख्यमंत्री: राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है

अन्य मंत्री: मुख्यमंत्री की सलाह से अन्य मंत्रियों की नियुक्ति

कार्यकाल: मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं

🎯 विशेष: छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा में जनजातीय कल्याण मंत्री की नियुक्ति अनिवार्य
अनुच्छेद 165
राज्य महाधिवक्ता

राज्यपाल राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति करता है

योग्यता: उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता होनी चाहिए

कार्य: राज्य सरकार को कानूनी सलाह देना

📋 राज्यपाल द्वारा की जाने वाली प्रमुख नियुक्तियाँ

🏛️ संवैधानिक पद
  • राज्य निर्वाचन आयोग के अध्यक्ष
  • राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य
  • राज्य मानवाधिकार आयोग
  • राज्य सूचना आयोग
🎓 शैक्षणिक पद
  • राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति
  • कुलाधिपति के रूप में कार्य
⚖️ न्यायिक पद
  • जिला न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
  • लोकायुक्त व उपलोकायुक्त
अनुच्छेद 174
विधानमंडल के सत्र

सत्र आहूत करना: राज्यपाल विधानमंडल के सत्र बुलाता है

समयसीमा: दो सत्रों के बीच अधिकतम 6 माह का अंतर

न्यूनतम: वर्ष में कम से कम 2 सत्र अनिवार्य

सत्रावसान: राज्यपाल सत्र का सत्रावसान कर सकता है

विघटन: विधानसभा को विघटित कर सकता है

अनुच्छेद 176
विशेष अभिभाषण

प्रथम सत्र: आम चुनाव के बाद प्रथम सत्र में अभिभाषण

वार्षिक: हर वर्ष के प्रथम सत्र में अभिभाषण

संदेश: विधानमंडल को संदेश भेज सकता है

उद्देश्य: सत्र आहवान के कारण बताना

अनुच्छेद 171
विधान परिषद में मनोनयन

संख्या: कुल सदस्यों का 1/6 भाग (16 सदस्य)

क्षेत्र:

  • कला
  • विज्ञान
  • साहित्य
  • सहकारिता आंदोलन
  • समाज सेवा
अनुच्छेद 167
मुख्यमंत्री के कर्तव्य

(क) राज्यपाल राज्य शासन की सूचना मांग सकता है

(ख) मुख्यमंत्री को सूचना देना आवश्यक है

(ग) मंत्री के निर्णय को मंत्रिपरिषद के सामने लाने को कह सकता है

📊 विधानमंडल सत्र प्रक्रिया

राज्यपाल सत्र आहूत करता है
विशेष अभिभाषण
कार्यवाही संचालन
सत्रावसान/विघटन

📋 विधेयक पर राज्यपाल के विकल्प (अनुच्छेद 200)

✅ स्वीकृति

राज्यपाल विधेयक पर तुरंत स्वीकृति दे सकता है

❌ स्वीकृति रोकना

आत्यंतिक वीटो – विधेयक को पूर्णतः रोक देना

🔄 पुनर्विचार

निलंबनकारी वीटो: सिफारिशों के साथ वापस भेजना

शर्त: धन विधेयक नहीं होना चाहिए

पुनः पारित: राज्यपाल को स्वीकार करना होगा

🏛️ राष्ट्रपति के लिए आरक्षित

कब:

  • राष्ट्रीय महत्व के विषय
  • उच्च न्यायालय की शक्ति कम करने वाले
  • नीति निर्देशक तत्वों के विरुद्ध
  • संवैधानिक उपबंधों के विरुद्ध

⚡ राष्ट्रपति द्वारा आरक्षित विधेयक प्रक्रिया (अनुच्छेद 201)

राज्य विधानमंडल से विधेयक आता है

राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के लिए आरक्षित

राष्ट्रपति के पास 4 विकल्प

✅ स्वीकृति ❌ अस्वीकृति 🔄 पुनर्विचार 🤐 जेबी वीटो

पुनर्विचार की स्थिति में

राज्य विधानमंडल को 6 माह में संशोधन सहित/रहित वापस भेजना

राष्ट्रपति का अंतिम निर्णय

स्वीकार या जेबी वीटो – कोई समयसीमा नहीं

⚡ अध्यादेश राज्यपाल की विधायी शक्ति है जब विधानमंडल सत्र में नहीं हो
अनुच्छेद 213(1)
अध्यादेश जारी करने की शक्ति

शर्तें:

  • विधानमंडल का सत्र नहीं चल रहा हो
  • तुरंत कार्यवाही की आवश्यकता हो
  • राज्यपाल को विश्वास हो कि परिस्थितियां विशेष हैं
अनुच्छेद 213(1क,ख,ग)
राष्ट्रपति की आज्ञा आवश्यक

निम्न विषयों में राज्यपाल स्वतंत्र रूप से अध्यादेश जारी नहीं कर सकता:

  • जिन विधेयकों को विधानमंडल में पुरःस्थापित करने से पूर्व राष्ट्रपति की मंजूरी चाहिए
  • जो राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखने हों
  • जो राष्ट्रपति की अनुमति के बिना अवैध घोषित हो सकते हैं

⏱️ अध्यादेश की वैधता प्रक्रिया (अनुच्छेद 213(2))

🚀 अध्यादेश जारी

राज्यपाल द्वारा जारी – तुरंत प्रभावी

📋 विधानमंडल के समक्ष रखना

सत्र शुरू होने पर तुरंत पेश करना आवश्यक

⏰ 6 सप्ताह की समयसीमा

विधानमंडल को अनुमोदन या अस्वीकार करना होगा

✅ परिणाम

अनुमोदन = जारी रहेगा | अस्वीकार/कोई कार्यवाही नहीं = समाप्त

🔥 महत्वपूर्ण बिंदु
  • अध्यादेश का वही प्रभाव जो विधानमंडल के अधिनियम का
  • राज्यपाल किसी भी समय वापस ले सकता है
  • द्विसदनीय राज्य में दोनों सदनों का अनुमोदन आवश्यक
📊 अनुमोदन प्रक्रिया
विधानसभा अनुमोदन
विधान परिषद सहमति
अध्यादेश वैध

Leave a Comment